माँ चंद्रघंटा की पूजा विधि | Chandraghanta Mata Ki Puja Vidhi PDF in Hindi

Chandraghanta Mata Ki Puja Vidhi PDF in Hindi: माँ चंद्रघंटा की पूजा विधि PDF का डायरेक्ट डाउनलोड लिंक को इसी पोस्ट में नीचे शेयर किया गया है, जिसका अनुसरण करके आप अच्छी क्वालिटी के पीडीऍफ़ को निशुल्क डाउनलोड कर सकते है|

सनातन धर्म में माँ चंद्रघंटा का काफी ज्यादा महत्वपूर्ण दिया जाता है और माँ चंद्रघंटा का पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है| अगर अप भी माँ चंद्रघंटा के सम्पूर्ण पूजा विधि को जानना चाहते है तो आपको इस पोस्ट में शेयर किया गया पीडीऍफ़ को अवश्य पढना चाहिए|

Chandraghanta Mata Ki Puja Vidhi PDF in Hindi

PDF name माँ चंद्रघंटा की पूजा विधि PDF
Language Hindi
No. of Pages 2
PDF Size 0.47 MB
Category Religion & Spirituality
Quality Excellent

माँ चंद्रघंटा की पूजा विधि PDF Summary

मुख्या तौर पर माँ चंद्रघंटा की पूजा नवरात्र के तीसरे दिया किया जाता है| और माँ चंद्रघंटा का पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है| आप सुखमय जीवन जीने के लिए माँ चंद्रघंटा की पूजा का आयोजन किसी भी दिन कर सकते है|

माँ चंद्रघंटा की पूजा भारत के लगभग सभी राज्यों में किया जाता है लेकिन गुजरात, बिहार, पश्चिम बंगाल के साथ-साथ उत्तर भारत के कुछ अन्य राज्यों में माँ चंद्रघंटा की पूजा को ज्यादा महत्व दिया जाता है|

आइये जानते है माँ चंद्रघंटा की पूजा विधि को-

  • पूजा प्रारंभ करने से पहले अच्छे से स्वच्छ पानी से स्नान अवश्य कर लें|
  • स्नान करने के पश्चात पूजन स्थल की सफाई अच्छे से करें|
  • उसके बाद माता की मूर्ति को गंगाजल से स्नान अवश्य कराएँ और स्नान करने के बाद सुनहरे रंग का वस्त्र पहनाएं|
  • उसके बाद माता को पुष्प का आला अवश्य पहनाये|
  • उसके बाद मिष्ठान, पंचामृत तथा मिश्री का भोग लगाएं|
  • माँ चंद्रघंटा को सफ़ेद भोग बहुत ज्यादा पसंद होता है इसीलिए सफ़ेद रंग का बर्फी का भोग अवश्य लगाये|
  • माँ चंद्रघंटा को आप शहद का भी भोग लगा सकते है|

माँ चंद्रघंटा की आरती / Chandraghanta Mata Ki Aarti PDF

जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे काम॥

चन्द्र समाज तू शीतल दाती।
चन्द्र तेज किरणों में समाती॥

मन की मालक मन भाती हो।
चन्द्रघण्टा तुम वर दाती हो॥

सुन्दर भाव को लाने वाली।
हर संकट में बचाने वाली॥

हर बुधवार को तुझे ध्याये।
श्रद्दा सहित तो विनय सुनाए॥

मूर्ति चन्द्र आकार बनाए।
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं॥

शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगत दाता॥

कांचीपुर स्थान तुम्हारा।
कर्नाटिका में मान तुम्हारा॥

नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी॥

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