इस पोस्ट के माध्यम से हम आपके साथ Bhairav Chalisa (भैरव चालीसा) PDF Hindi शेयर करेंगे, जिसे आप इसी पोस्ट में नीचे दिए गये डायरेक्ट डाउनलोड लिंक के माध्यम से डाउनलोड कर सकते है|
भैरव चालीसा का पाठ हिन्दू मानयताओं के अनुसार बहुत ही अच्छा होता है और ऐसा करने से हमारी सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है| इसीलिए भैरव चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए|
Bhairav Chalisa in Hindi PDF
| PDF Name | भैरव चालीसा PDF |
| Language | Hindi |
| No. of Pages | 2 |
| PDF Size | 0.26 MB |
| Category | Religious |
| Quality | Excellent |
भैरव चालीसा PDF Summary
भैरव चालीसा, भैरव बाबा से प्रार्थना और एक सुखी पूर्ण जीवन का वरदान मांगने का एक जरिया है| भैरव बाबा का मान्यता हिन्दू धर्म में बहुत ज्यादा हिया उर भारत के कई राज्यों में भैरव बाबा की पूजा भी धूम धाम से किया जाता है|
ऐसा मान्यता है कि भैरव बाबा का पूजा करने से आपके मन से भय और नकारात्मकता का नाश होता हिया उर आपको एक निरोगी और शांतिपूर्ण जीवन प्राप्त होता है|
बाबा भैरव की विशेष दिन जैसे Bhairav Ashtami या Kala Bhairav Jayanti के दिन सबसे ज्यादा किया जाता है परन्तु आप भैरव बाबा की पूजा सभी भी सच्चे मन से कर सकते है|
आइये भराव चालीसा को जानते है|
| भैरव चालीसा |
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| ।। दोहा ।।
श्री गणपति गुरु गौरी पद प्रेम सहित धरि माथ। श्री भैरव संकट हरण मंगल करण कृपाल। ।। चालीसा ।। जयति बटुक- भैरव भय हारी। जयति नाथ- भैरव विख्याता। भैरव रूप कियो शिव धारण। भैरव रव सुनि हवै भय दूरी। शेष महेश आदि गुण गायो। जटा जूट शिर चंद्र विराजत। कटि करधनी घुंघरू बाजत। जीवन दान दास को दीन्ह्यो। वसि रसना बनि सारद- काली। धन्य धन्य भैरव भय भंजन। कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा। जो भैरव निर्भय गुण गावत। रूप विशाल कठिन दुख मोचन। अगणित भूत प्रेत संग डोलत। रुद्रकाय काली के लाला। बटुक नाथ हो काल गंभीरा। करत नीनहूं रूप प्रकाशा। रत्न जड़ित कंचन सिंहासन। तुमहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं। जय प्रभु संहारक सुनन्द जय। भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय। महा भीम भीषण शरीर जय। अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय। निमिष दिगंबर चक्रनाथ जय। त् रेशलेश भूतेश चंद्र जय। श्री वामन नकुलेश चण्ड जय। रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर। करि मद पान शम्भु गुणगावत। करत कृपा जन पर बहु ढंगा। देयं काल भैरव जब सोटा। जनकर निर्मल होय शरीरा। श्री भैरव भूतों के राजा। ऐलादी के दुख निवारयो। सुन्दर दास सहित अनुरागा। श्री भैरव जी की जय लेख्यो। ।। दोहा ।। जो यह चालीसा पढ़े, प्रेम सहित सत बार । जय श्री भैरवाय नमः !! |